अनुभवहीन भारतीय गृहिणी का अनुभवी चुदाई का मजा

अब तक बारह मिनट बीत चुके थे, वो पेंट की ज़िप पकडे पीछे को घुमा और भागते हुए ज़िपर को ऊपर खींचने लगा और यहीं उसने गलती कर दी. अचानक प्रतिमा महसूस करती है कि उसके अंगूठे और तर्जनी ऊँगली में थामे हुए लंड में कुछ हरकत हो रही है. हिंदी XXX पुरष को अपने लंड पर किसी औरत के होंठो का नर्म एहसास हमेशा सुखद प्रतीत होता है चाहे वो औरत उसकी माँ ही क्यों ना हो. अकेले रहते हो और आपको कितना …..कितना काम अकेले करना पढता है, इसीलिए मैंने सोचा, आप की काम में मदद कर दूंगा और….और …” रिशु से आगे बोला नहीं जा रहा था.“और? प्रतिमा नज़र नीची करके उसकी पेंट में बुरी तरह झटके मार रहे लंड को देखती है तो उसकी कामरस से गीली चूत में सनसनी होने लगती है.“तुम जाकर टीवी लगाओ, मैं अभी आती हूँ” प्रतिमा मुस्कराती हुई उसे बोलती है और पीछे को मुडकर वो खुद सिंक के पास चली जाती है. और क्या?” प्रतिमा धीमी सी आवाज़ में बोलती है.“और …और आपको कंपनी भी मिल जाएगी, आपका अकेलापन भी दूर…….दूर हो जाएगा”, रिशु थूक गटकता है. मगर काम के बोझ के नीचे दबे उसके पति में इतनी हिम्मत कहाँ रह पाती थी. वो तमाचा लगने से इतना आहत नहीं था.

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