रात को खाना खाने के बाद शशांक बोला माँ क्या मैं आपके साथ सो सकता हु, क्यों की मैं आपके साथ दिल्ली में सोता था, मुझे काफी सकून मिलता है.तो मैंने कहा हां हां क्यों नहीं सो जाओ मेरे साथ, फिर माँ बेटा सोने चले गए, मैंने मन ही मन में सोचा जिस तरह से वो शाम को मेरे से गले मिल रहा था और रात को भी वो जरूर ही कोई शरारत करेगा, कुछ देर बात चीत की फिर मैंने सोने का नाटक किया और अपना सारी का आँचल निचे अपने ब्लाउज से उतार दिया, और रजाई को ब्लाउज से थोड़ा निचे तक रखा, और आँख बंद कर लिया.वो फिर मेरे तरफ घूम गया पहले तो उसने मेरे पेट पे हाथ रखा फिर रज़ाई को थोड़ा निचे सरका दिया, मेरी सांस जोर जोर से चलने लगी, जिससे की मेरा चूच ऊपर निचे हो रहा था, उसका लंड खड़ा हो चूका था क्यों की उसका लंड मेरे कमर को छू रहा था जिससे मैं और भी ज्यादा सिहर रही थी, मेरी गरम गरम साँसे चल रही थी.उसके बाद शशांक ने अपना हाथ मेरे चूच पे रख दिया, मैं चुपचाप रही, और सोने का नाटक कर रही थी, फिर वो धीरे धीरे दबाने लगा मैंने थोड़ा अपने शरीर को हिलाया तो वो चुपचाप हो गया, मैंने सोचा अगर मैंने उसका हाथ नहीं हटाया















