रविवार वाले दिन, मै सो गयी और रवि ने अपने कमरे को बंद कर लिया और पूरा नंगा हो कर ब्लूफिल्म देखने लगा. हिंदी XXX मैने ज्यादा वक़्त बर्बाद ना करते हुए, अपने हाथ से कृष्णा का लंड अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और मेरे मुह से मस्ती भरी सिसकिया निकलने लगी आआआ… ऊऊऊऊऊओ… ओओओह्ह्ह्हह… बस… आह…और पूरा कमरा मेरी और कृष्णा की कामुक आवाजो से गूंजने लगा. कृष्णा, बेचारा कुछ नहीं बोल पा रहा था और मै उसका रेप करने पर तुली हुई थी. उस समय मेरी उम्र करीब ३७ साल की होगी और मेरे पति के साथ मेरी सेक्स लाइफ बहुत ही अच्छी थी और उनके जाने के बाद, मुझे रात को बिस्तर पर नीद नहीं आती थी.मेरी चूत एक लंड के लिए लिए तड़पती रहती थी, मै पति के साथ फ़ोन रोती थी, लेकिन उनकी भी मज़बूरी थी. और वो मजाक मे बोलते थे, कि ऑफिस की लड़कियों के नाम पर बाथरूम मे मुठ मार लेता हु; और जोर-जोर से हसने लगते थे और मैं उनसे बनावटी गुस्सा करने लगती थी. मुझे सोते-सोते पेशाब की हुड़क लगी, तो मै संडास मे पेशाब करने गयी. कृष्णा के चहरे पर थकान लग रही थी और वो कुर्सी से गिरने लगा. मुझे अकेला घर काटता था, तो मैने ही उससे थोड़ी बहुत बातचीत शुरू कर दी.और धीरे-धीरे वो मुझे से खुलने लगा















