मेरा पूरा का पूरा शरीर कांप रहा था। लेकिन बाजी कुछ नहीं बोली। बाजी सिर्फ़ एक बार मुझे देखी और फिर सड़क पर देखने लगी। मैं भी बाजी की तरफ़ डर के मारे नहीं देख रहा था। मैं भी सड़क पर देख रहा था और अपना हाथ से बाजी की एक चूची को धीरे धीरे सहला रहा था।मैं पहले धीरे धीरे बाजी की एक चूची को सहला रहा था और फिर थोड़ी देर के बाद बाजी की एक मुलायम गोल गोल, नरम लेकिन तनी चूची को अपने हाथ से ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा। बाजी की चूची काफ़ी बड़ी थे और मेरे पंजे में नहीं समा रही थी।थोड़ी देर बाद मुझे बाजी की कुर्ता और ब्रा के उपर से लगा की चूची के निपपले तन गयी और मैं समझ गया की मेरे चूची मसलने से बाजी गरमा गयी हैं बाजी की कुर्ता और ब्रा के कपड़े बहुत ही महीन और मुलायम थी और उनके ऊपेर से मुझे बाजी की निपपले तनने के बाद बाजी की चूची छूने से मुझे जैसे स्वर्ग मिल गया था।किसी जवान लड़की के चूची छूने का मेरा यह पहला अवसर था। मुझे पता ही नहीं चला की मैं कब तक बाजी की चूचियों को मसलता रहा। और बाजी ने भी मुझे एक बार के लिए मना नहीं किया। बाजी चुपचाप ख़ड़ी हो कर मुझसे अपना चूची मसलवाती रही।















