जाने कल्पना ने मुझमे क्या देखा कि हम दोनों में धीरे धीरे बातचीत शुरू हुई फोन पर और फ़िर वो अपने ऑफिस के बाद मेरे ऑफिस में आने लगी.हम दोनों साथ में ही खाना खाते, नाश्ता करते और शाम को ७ बजे बाद मैं उसको उसके घर के बाहर मेन रोड पर छोड़ भी आता. हिंदी XXX मुँह से मुह मिले हुए थे. हम एक दूसरे के होंट और जीभ को खूब चूसने लगे. आश्चर्य की बात थी कि आज के जमाने में कोई ऐसी भी लड़की थी जिसको सेक्स की कोई जानकारी नही थी.मेरी उस से कोई ग़लत फायदा उठाने की नीयत नही थी. उसके हाथ मेरी गर्दन पर लिपटे हुए थे. वो तो जैसे पागल हो गई. उसको सेक्स चढ़ने लगा. मैंने उसको जाने के लिए बोला और कहा कि आपके फ़ोन पर कॉल करके आपको बुला लिया जाएगा. आश्चर्य की बात थी कि आज के जमाने में कोई ऐसी भी लड़की थी जिसको सेक्स की कोई जानकारी नही थी.मेरी उस से कोई ग़लत फायदा उठाने की नीयत नही थी. वो लड़की नमस्ते कर के सामने कुर्सी पर बैठ गई. फ़िर तो हम एक दूसरे से खुलते गए. साधारण शक्ल सूरत की लड़की ५ फुट ६ इंच कद की थी. वो लम्बी साँसे लेने लगी. डॉक्टर की तरह ही उस से भी अच्छी दोस्ती रखना चाहता था. मेरी इच्छा थी उस से










