उसकी पीठ कितनी लम्बी, नग्न और सेक्सी लग रही थी।मैं हाथ से नीचे से उपर उसकी पीठ को सहलाने लगा। धीरे धीरे अंशिका को मजा आने लगा। वो जल्दी जल्दी मेरा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी। मुझे अच्छा लग रहा था। मेरी गोलियां बार बार बड़ी होती, सिकुड़ जाती, फिर बड़ी हो जाती।अंशिका मेरी गोलियों को सहला रही थी।फिर उसके हाथ जल्दी जल्दी मेरे लंड पर उपर नीचे दौड़ने लगे। अंशिका जल्दी जल्दी मेरा लंड फेट रही थी। गोल गोल करके वो फेट रही थी। मेरा सूखा लंड अब फिर से खड़ा होने लगा था। मेरे लंड की नशे तनने लगी थी। अजीब सा अहसास था वो। थोडा अजीब और थोडा अच्छा। मैं अंशिका के कंधे को हाथ से सहला रहा था। कितने सुंदर और दूधिया कंधे से उसके। मैंने अंशिका को अपनी तरफ खीचा और उसके बाए कंधे पर दांत गड़ाकर काट लिया।“……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” वो तडप गई। उसे बहुत दर्द हुआ था।मेरे दांत उसके कंधे पर बन गये थे। पर सेक्स के नशे में वो सह गयी। वो फिर से मेरा लंड चूसने लगी। कुछ देर बाद मैं उसे खेत में ही कुतिया बना दी और उसकी कुवारी गांड चोद ली। 10 दिन तक मैंने गाँव में मक्के के खेत में अंशिका की चूत और गांड बजाई। फिर मैं दिल्ली चला गया। दोस्तों अब रोज उसे मेरे लंड की तलब लगती















