तुम्हारा जब मन करे तब घर चले जाना.में : हाँ वो तो है और आप मुझसे क्यों शरमा रही हो यार? जब भी किसी का फोन आता है तो मुझे मालूम नहीं पड़ता. हिंदी XXX फिर उसकी पेंटी को खोलकर उसकी चूत में उंगली करने लगा और अब हम 69 में थे.. और में अक्सर जब भी मौका मिलता उसको तकता रहता था.. तो में भी उनके पीछे पीछे चला गया और बोला कि आंटी आपको यह सब करने में दिक्कत क्या है? मुझे भगा रही हो ना?आंटी : नहीं बेटा.. क्या खा ही जाओगे?फिर में उस बेहोशी को तोड़कर अपने होश में आया तो उसने मुझसे कहा कि मेरे मोबाईल में रिंगटोन की आवाज़ बढ़ा दो.. फिर जब में उनके घर पर पहुंचा और दरवाज़ा बजाया तो आंटी ने आकर दरवाज़ा खोला.. तभी मुझे आंटी के कमरे की खिड़की खुली दिखी और मैंने देखा कि उसके कमरे की लाईट भी जल रही थी. लेकिन अब तुम बैठो में अभी कुछ समय में नहाकर आई और फिर तुम खुद ऊपर जाकर अपनी बॉल ले आना.में : आंटी प्लीज़ आप ला कर दे दो ना.. तो मैंने उनको थोड़ा नजर चुराकर देखा वो बहुत ही जबरदस्त हॉट, सेक्सी लग रही थी और मुझसे नज़रे चुरा रही थी.. ऐसा सेक्स तो तुम्हारे अंकल ने मेरी सुहागरात पर किया था.















