और में जल्द ही हवाओं में उड़ कर अपने शोहर की बाहों में पहुँच जाऊंगी. हिंदी XXX जैसे वो शालीमार बाघ की सैर करने निकली हो.साथ ही साथ खालिद एक हाथ से मेरे बदन को अपने सीने पर भींचे हुए था. इस लिए में खामोश हो गई और फिर जमाल को फ़ोन किया और माफी माँग ने लगी. तो वाकई ही कोई भी मेरी इस बात को कबूल नही करे गा कि खालिद खुद मेरे कमरे में आया है.बल्कि इस के बजाय सब खालिद की कही हुई बात का यकीन करेंगे कि मैने ही उसे अपने पास अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिए बुलाया हो गा. जिस वजह से रात की तन्हाई में अबाबा मेरे कमरे में बिना किसी ख़ौफ़ के चले आते और मुझे चोद कर अपने लंड की तसल्ली कर लेते.वो मुझे चोदते वक़्त अक्सर कमरे की लाइट ऑन नही करते थे. धक्का देते वक़्त ज्यूँ ही मेरी नज़र उस शक्स के चेहरे पर पड़ी तो मेरा रंग फक हो गया. वो उस के साथ आज इस तरह बिल्कुल नंगे लेटे हुए थे और उन के चेहरे पर निदमत (शर्म) नाम की कोई चीज़ भी नही थी.में अपना जिस्म ब्लंकेट से छुपाने लगी तो ज़लील अब्बा ने मेरा हाथ थाम लिया और मुझे ज़बरदस्ती अपने साथ लिटाने लगे.















