क्या वो तेरी सेवा करती है काफी, सौतेले बेटे? – इंडिया समर

मैं राघव से बड़ी थी.लेकिन सिर्फ़ एक साल का फ़र्क होने की वजह से वो मुझे दीदी ना बोल कर सीमा ही बोलता था. सहेलियो, अब तक नही की हो तो एक बार बैंगन का फ़ॉर्मूला ट्राइ करके देखो, मज़ा आ जाएगा. हिंदी XXX बड़े होने के बाद पहली बार राघव मुझसे इतना सट कर बैठा था.जैसे ही उसने किक मारी और मेरे हाथ से ही एक्शिलेटर बड़ाई बाइक उच्छल गयी और मैं राघव के सीने पर लड़ गयी. माँ के जान-पहचान से राघव को एक सेठ ने ड्राइवर रख लिया. माँ के जान-पहचान से राघव को एक सेठ ने ड्राइवर रख लिया. राघव ने पहले मेरे गालो को सहलाया और मेरा एक हाथ अपनी पीठ पर रख दिया, उसका दूसरा हाथ मेरे जाँघो को सहलाने लगा, मैं लगभग बेहोश थी, मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था.उसकी उंगली मेरी पेंटी के किनारे से अंदर की ओर जाने लगी, मुझे 105 डिग्री फीवर की कंपकपि आ गयी, मेरी दोनो चुचियाँ उसके जाँघ से दबी हुई थी. बैंगन अपने-आप फिसल कर नीचे गिर गया, थोड़ी राहत मिली. अगर राघव वहा होता तो समझ जाता की मैं बैंगन को एसे पकड़ रही थी जैसे किसी लंड को पकड़ रही हू. मैं ना तो कुछ बोल पा रही थी ना ही उसे रोक पा रही थी, कुछ ही देर मे मैं अपनी उपरी जाँघ पर

क्या वो तेरी सेवा करती है काफी, सौतेले बेटे? – इंडिया समर

Related videos