मैं उसके घर को घूम कर देख ही रहा था कि वो पानी ले कर आयी. ऐसे ही शान्त लेते रहना कोई गड़बड़ ना करना… अब मेरी बारी है.मैंने केवल गर्दन हिला कर हां कर दिया. XXX Hindi मैंने उससे माफी माँगी और रात की दवाई के लिए उसे धन्यवाद कहा.मैंने पूछा कि दवाई के कितने पैसे हुए?वो बोली- अब तबियत कैसी है?मैंने कहा- बहुत अच्छी है.वो मुस्कुरा कर बोली- तो ठीक है, आज रात को मुझे डिनर करवा देना.मैंने कहा- जरूर… आप जहां बोलो.वो हंसी और चली गयी, उसने न समय बोला. उसने भी अपने पैर मेरी कमर पर लपेट लिए और मेरे गाल पर एक पप्पी कर दी.फिर वो मुझे अपने कमरे में ले गयी और बोली- सेवक अब हमारे कपड़े बदलो.मैंने भी झुक कर सलाम किया और उसकी कमीज़ के बटन खोलने लगा. मैंने समय ना गंवाते हुए उसकी चुची मुँह में भर ली और जोर जोर से चूसने लगा और दूसरी को मसलने लगा. कब लंड बाहर निकला, कुछ पता नहीं. तो हमें किसी के देखने का कोई डर नहीं था.मैंने उसे उसी मेज़ पर उसे लिटा दिया और उसके पूरे बदन को नीचे से ऊपर तक चाटने लगा. वो हर सेकंड में 3 धक्के तो लगा ही रही होगी. मस्त लंड है.फिर मुझे लुंगी दी और कहा- लो पहन लो… नहीं तो अभी तुम्हारा चोदन कर दूँगी.मैंने बिना कुछ















