फिर मैंने कहा कि रुक में तुझे अभी और भी पिलाती हूँ.. में अब मेरे ही पापा और अपने छोटे भाई को अलग तरह से देखने लगी और मुझे लगा कि में यह कुछ ट्राई करूं लेकिन मुझे यह सब मुमकिन नहीं लगता था.दोस्तों वैसे मेरे पापा और छोटा भाई मुझसे बहुत अच्छी तरह से रहते थे और मुझे बहुत प्यार भी करते थे. हिंदी XXX फिर उसके अगले दिन पापा के ऑफिस जाते ही मम्मी भी किसी काम से बाज़ार चली गयी और अंकिता स्कूल चली गई लेकिन अरुण को मैंने रोक लिया और वो भी मान गया और समझ गया कि मैंने उसे क्यों रोका है.में : अरुण आज घर पर कोई नहीं हम दोनों अकेले है. क्या वो सही था?अरुण : दीदी में उस दिन नींद में था लेकिन आप तो जाग रही थी.में : क्या तुझे मेरे बूब्स देखने है.अरुण : दीदी आप पागल हो क्या.. में इतनी खुश थी कि में क्या बताऊँ.मैंने अपनी पूरी जीभ उसके मुहं में घुसा दी और उसकी भी जीभ को बहुत जमकर चूसा तो उसका लंड इतनी जोश भरी किस के कारण फिर से तनकर खड़ा हो गया था. मैंने टी-शर्ट के अंदर कुछ नहीं पहना था और जैसे ही उसने टी-शर्ट को खोला तो मेरे दोनों बूब्स उसकी नजरों के सामने थे और मेरे बूब्स को छूकर उसका लंड खड़ा हो गया.फिर















