अब ये सिलसिला पर रोकना! हिंदी XXX सारे आसनों से बारी बारी चुदाई करता हूँ उन्होंने लिख के भेजा. मैंने व्हाट्सअप पर लिखकर पूछ लिया. मैंने सफ़ेद रंग की कॉटन ब्रा पहन राखी थी. ननदोई ने दरवाजा बंद कर लिया. मैंने कामुक अंदाज में कहा. ननदोई जी ने एक झटका देकर मुझे अपनी ओर खीच लिया. ननदोई आ गए.सलहज जी! वो मेरे बदन पर टूट पड़े. सलहज जी !! मेरी चूत गीली होने लगी.आपको बता दूँ की एक बच्चा होने के बाद भी मेरा स्तन अभी भी कसे और सुडोल थे. इसमें तो सब्जियां ही रखी थी. वही दूसरी तरफ मेरे ससुर भी बहुत अच्छे इंसान थे. मैं तो बिलकुल से झेप गयी.कोई आसान नहीं छोड़ता हूँ. बस हल्का मुस्का दी. पर कुछ देर बाद उधर से जवाब आ गया. हमेशा मेरे टच में रहिएगा नन्दोई बोले. पर आज जिंदगी में कोई दूसर मर्द मेरा स्तन पान कर रहा था. मेरी लाल रंग की कुर्ती उन्होंने निकाल दी. चलिए कैंटीन में चल कर कर कुछ खा पी लिया जाए सूरज बोले मैं उनके साथ हो ली हम दोनों कैंटीन में चले गए वाहन कोई नहीं था सूरज ने चाय और समोशे का आर्डर दिया हम बात करने लगे सूरज मुझे अजीब नजरों ने देख रहे थे.ननदोई जी! पर कुछ देर बाद उधर से जवाब आ गया.















