मैं खुले आम लड़कों को लाइन देती थी, सभी मेरी इस अदा के दीवाने बन गए।कुछ ही दिनों में अनारों के आम बन गए वो भी तोतापरी, क्यूं कि तोतापरी आगे से तिरछे होते हैं, मेरे चूचूक भी तोतापरी बन गए थे। हम तीन सहेलियाँ थी, जब अकेली बैठती तो एक दूसरी की स्कर्ट उठवाकर चूतों को देखती। गुड़िया और दीपा की चूत मेरी चूत से थोड़ी अलग थी, उनकी झिल्ली बाहर दिखने लगी थी, वहीं मेरी झिल्ली लटकती नहीं थी।तभी हमारे स्कूल में मर्द स्पोर्ट्स टीचर आये, पहले हमेशा कोई औरत ही उस पोस्ट पर आती थी। उस को नई-नई नौकरी मिली थी, बहुत खूबसूरत था, स्मार्ट था, हम लड़कियों ने उसका नाम चिपकू डाल दिया क्योंकि वो किसी न किसी मैडम से बतियाता रहता था।उधर मैं उस पर जाल फेंकने लगी, उसको अपनी जान बनाने के लिए! School Girl Pahla Sexमेरा चुदना स्कूल से चालू हो गया था, संस्कार ही वैसे थे, पापा के विदेश जाने के बाद और फिर चाचा भी पीछे-पीछे विदेश चले गए। पीछे मटरगश्ती के लिए दो बला की खूबसूरत बीवियाँ छोड़ गए मेरे बापू और चाचू यानि मेरी माँ और चाची! हिंदी XXX कहाँ हूँ छोटी?”उठकर उसके होंठ चूम लिए और बोली- देखो, मुझे सब कुछ पता है कि लड़का लड़की को क्या करता है। मैंने उसकी टी शर्ट उतार दी, वो गुस्सा होने लगा तो मैंने















