फिर मत कहना की लण्ड की प्यासी है! XXX Hindi अब क्यों तेरी गाण्ड फट रही है?? मैंने कीर्ति से कहा.वो कुतिया बन गयी। जैसै ही लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड पर रखा, लण्ड बिना किसी रुकावट के गाण्ड में अंदर धस गया।ये क्या कीर्ति!।तेरी गाण्ड तो चुदी है! वादा है! मैंने कहा।कीर्ति उठी। वो नँगी थी। उसने गर्म कपड़े पहन लिए। फिर उसने आलस छोड़ कर दाल, चावल, सब्जी, रोटी सब बनाया। हम दोनों भाई बहनों ने खाना खाया।भइया! मुझे और चुदवाना है। मेरी चूत की गर्मी शांत नही हुई है! हाय मम्मी!! चाहो तो और चोद लो! फिकर मत कर! फिर मत कहना की लण्ड की प्यासी है! मैंने बहना से पूछा.भइया भइया! मैंने बड़े प्यार से पूछा.नही भैया! तेरी तो मैं माँ चोद दूँगा रंडी कही की!मैंने 2 3 तमाचे कीर्ति के चुत्तड़ो पर फिर रसीद कर दिए। वो रोने लगी। मैं मजे से उसकी गाड़ फाड़ता रहा। मैं वहसी दरिंदा हो गया था। मैं करता ही क्या? कितना लण्ड खाएगी?? मैंने पूछा.वो भैया जब नीरज से मैंने चुदवाया था तो उसने पता नही कहाँ से मेरी गाण्ड देख ली। बोला तेरी गाण्ड बड़ी चिकनी है। तेरी गाण्ड भी चोदूंगा। तो मैंने गाण्ड भी चुदवा ली। कीर्ति बोली.साली हरामखोर! मैं तुझको सती सावित्री समझता था, तू तो बड़ी छिनाल निकली!!










