मेरे बेडरूम में घुसते ही वो भी पीछे-पीछे आ गया और उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर पीछे से अपने से चिपका लिया।“सानिया … तू तो बहुत चिकनी है रे … मां कसम … चुदा ले एक बार…!”“देखो बजरंग … फैजान को पता चल गया ना तो तेरी गाण्ड मार देगा!”उसने मेरे सीने के उभार अपनी हथेलियों में भींच लिये। मैं तड़प कर परे हट गई। उसने भी यूं तो शराब पी रखी थी पर नशा उसे शराब का नहीं, मेरा चढा हुआ था। उसने झपट कर मुझे अपने से चिपका लिया।“अरे छोड़ ना, बड़ा मर्द बनता है … मुझे चोदना है तो ऐसे करेगा क्या ?”“सच कहता हू सानिया, तेरी आस तो मुझे कब से है … तेरे नाम की मैं तो रोज मुठ मारता हूँ … एक बार चुदा ले बस… मेरे दिल की हसरत निकल जाये !”मैंने उसे अपने से फिर दूर किया और कहा,”चल ठीक है, मेरी बात मानेगा… पहले इस फैजान की गाण्ड मार … हरामी मुझे बहुत गालियाँ देता है !”“बस , इतनी सी बात… ये तो मुझसे अक्सर गाण्ड मराता है … तू कहे तो इसकी मां को ही चोद दूँ !”“चल उठा इसे, नीचे दरी पर सुला दे…”बजरंग ने उसे खींच कर नीचे दरी पर उल्टा लेटा दिया। मैंने तो सिर्फ़ पेटीकोट ही पहन रखा था, सो उसे उठा कर मैंने बजरंग को















