.ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी। मैं हाथ से जोर जोर से मसलने लगा। फिर अपना मुंह लगाकर दोनों कसी कसी चूचियों में मसलने लगा।इस तरह से उसे खूब मजा लिया। दोनों बूब्स को मुंह में लेकर चूस रहा था। मुंह चला चलाकर रस पी रहा था अपनी कमसिन जवान बेटी का। इस तरह से काफी आनन्द मिला मुझे। पानी में भीगा रचना बेटी का जिस्म किसी आग के शोले से कम नही लग रहा था। वो मेरे 12” लौड़े को पकड़कर ली और फेटने लगी।फिर जमींन में बैठकर मुंह में लेकर चूसने लगी। कुछ देर चुसवाता रहा।“बेटी!! XXX Hindi आपका लौड़ा तो कितना काला है” वो मुंह बनाकर बोली.“बेटी काला है पर दिलवाला भी है” मैंने मुस्कुराकर कहा.मेरी बात सुनकर रचना चुदासी हो गयी और मेरे 3” मोटे लौड़े को फेटने लगी। मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा सी सी सी” करने लगा। रचना इस तरह से लौड़ा फेट रही थी जैसे कितने मर्दों का फेट चुकी थी। धीरे धीरे उसके हाथ की रफ्तार बढती चली गयी।फिर तेज तेज लंड को मुठ देने लगी। बड़ा आनंद मिला मुझे। मेरी दोनों गोलियों पर उसकी उँगलियों का स्पर्श कितना सुहावना था। मैंने अपनी झांटे अच्छे से साफ़ कर रखी थी। जिस वजह से उसको साफ़ सुथरा लंड नसीब हुआ था। मेरे पैरो के पास बैठकर नाईट लैप्म की रौशनी में मुझे उसके 36” के रसीले मम्मे दिख गये।रचना















