अब उसकी मरदानगी जग चुकी थी, भयंकर रुप लिये बरसो के चूत के प्यासे मोटे लंबे लंड को उसने अपने प्यारी बहू की मुलायम चिकनी चूत मे डाल देने का फ़ैसला कर लिया था।उसने उसकी टांगे खोल दीं। और चूत का दरवाज्जा खोला अपने उंगलियों से, कमला मारे उत्तेजना के गालियां बक रही थी। वो खेली खायी माल थी। बुड्ढे ने अपने लंड के सुपारे को चूत के मुहाने पर छोटे से छेद के बाहरी दीवाल वाली लाल लाल पंखुड़ी पर घिसने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.कमला की सिसकारियां गहरी होती चली जा रहीं थीं। ससुर रामू ने उसकी बाहरी की मेजोरा लीबिया मतलब कि चूत की बाहरी दीवाल को ऐसे खीच रखा था जैसे टीचर किसी छोटे बच्चे का कान खींच के पनिशमेंट दे रहा हो। माहोल एकदम गरम हो चुका था। दोनो तरफ़ की दीवालो को रगड़ने के बाद बुड्ढे ने अपना लंड का मुह कमला के थूक से दोबारा गीला करने के लिये कमला के मुह में हाथ डाल ढेर सारा थूक् बटोरा.और फ़िर अपने लंड के मुहाने पर लगा और अपना थूक उसकी चूत में चारो तरफ़ घंस कर अपना लंड धंसाना शुरु कर दिया। कमला की आंखें नाचने लगीं थी उसकी कहानी ससुर के लंड से लिखी जा रही थी। और वाकइ ससुर रामू का बुढ्ढा लंड जवानों के लंड















