ट्रेन में मुझे बहुत आराम मिला। बस आप पूछो मत!!” मैंने बोली.मैं फिर जाते ही सो गयी थी। कुछ देर बाद मेरे हसबैंड का फोन आ गया। मैंने उनको बताया की कोई दिक्कत नही हुई। दूसरे दिन होली थी। मेरी बहन ने मुझे गालो पर ढेर सारा रंग लगा दिया था। मेरा भाई सनी भी बहुत शरारती थी। पूरे परिवार के साथ मैंने खूब होली खेली। मुझे मायके में बहुत मजा आ रहा था।यहाँ पर कब सुबह होती थी और कब रात पता ही नही चलता था। इस तरह से 10 दिन मेरा मायके में गुजर गया। अब रात होती तो फिर से वो अजनबी मर्द मुझे याद आ जाता था। मैं उसको याद कर करके चूत में ऊँगली डालकर आनन्द ले लेती थी। इस तरह से कुछ राते मैंने चूत में ऊँगली डालकर काम चलाया। अब तो ऊँगली से भी मजा नही मिलता था।क्यूंकि अगर दोस्तों लंड की बजाय लड़कियों को ऊँगली से मजा मिल जाता तो कोई लड़की लंड से नही चुदाती। फिर तो मेरा एक एक मिनट कटना मुस्किल होता जा रहा था। मेरे हसबैंड भी मेरे पास नही थे जो मुझे चोदकर मजा दे देते। अब मुझे अजय की याद आने लगी। शादी से पहले वो मेरा बॉयफ्रेंड था। उसने मुझे कितनी बार चोदकर मजा दिया था। मैंने फौरन अजय को काल कर दिया।“हलो” वो उस साइड से















