उन्होंने मुझे बातें करने के लिए अपने घर बुलाया, में बहुत खुश हुआ और उनके घर पर गया और बेल बजाई. में काफ़ी थक गया था और वो भी पूरी तरह से झड़ गयी थी. हिंदी XXX में अब उसके मदमस्त रसीले चूचे अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दातों से काटने लगा, वो सिसकारियां भरने लगी, आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्हह्ह ओमी, प्लीज छोड़ दो, अहह ओह.उसकी आवाज़ से मुझे और नशा चढ़ रहा था और चूचे चूसते हुए मैंने अपना एक हाथ उसकी पेंटी के अंदर डाल दिया, तो उसकी झाटों वाली रसीली चूत पानी-पानी हो गयी थी. पता नहीं क्यों मुझे ये अच्छा लगने लगा और मेरे मन में भाभी को चोदने की और खास बात उनकी चूचीयाँ चूसने की इच्छा पैदा हो गयी. भैया ने मुझे जाते वक़्त बताया था कि कल भाभी को संजीवनी स्कूल में जाना है, उनके बड़े बेटे (सन्नी, उम्र 6 साल) के एडमिशन के लिए. सुबह मेरे उठने से पहले रोहिणी अंकुर को मेरी मम्मी के पास छोड़ कर चली गयी, मैंने अंकुर को अपने पास बुलाया और उसे चोकलेट का छोटा टुकड़ा हाथ में दिया. मैंने उसे साड़ी निकालने को कहा, तो उसने निकाल दी, अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्लाउज और सफ़ेद पेंटी में थी.फिर में उसके ऊपर आ गया और उसके चेहरे को चूमने लगा और ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए.















