उसके बाद मैं सविता आंटी के घर से निकल गया और सीधा अपने घर पहुँचा। घर जाते ही मैंने डोर बेल बजाई और मम्मी ने गेट खोला। मुझे देखकर बोलीं:माँ: आ गया बेटा?मैं: नहीं, रास्ते में हूँ।माँ: क्या, मज़ाक कर रहा है?मैं: शुरू किसने किया?माँ: हाँ ठीक है, ठीक है। तो फ्रेश हो जा और नाश्ता कर ले।मैं: मैं सविता आंटी के यहाँ से नाश्ता करके आया हूँ।माँ: अच्छा, ठीक है।फिर मैं अपने कमरे में चला गया और सविता आंटी को कॉल किया।सविता: हाँ, पहुँच गया?मैं: हाँ, पहुँच गया। ओके, अब प्लान को एग्जीक्यूट करना है। रात को मम्मी को कॉल कर देना।सविता: हाँ, हाँ, रात तो होने दे।मैं: यार, क्या करूँ, मम्मी की चुदाई करनी है, सब्र नहीं हो रहा।सविता: थोड़ा सब्र रख, जल्दबाज़ी में काम मत खराब कर देना।मैं: हाँ, हाँ, ठीक है।उसके बाद मैं रात होने का इंतज़ार करने लगा। और कसम से बताऊँ, मुझसे बिल्कुल इंतज़ार नहीं हो रहा था। उस चक्कर में मैंने मम्मी के नाम की कई बार मुठ मार ली। फिर रात होती है। हमेशा की तरह मैं मम्मी के कमरे के पास चला जाता हूँ। और मम्मी भी पूरी नंगी होकर चूत में उंगली कर रही थीं। और शायद वो उस वक़्त उसी माँओं वाले ग्रुप पर चैट कर रही थीं। तभी मम्मी को कॉल आया। वो सविता आंटी का ही कॉल था।सविता: और















