उनके परिवार में वो अंकल, आंटी और उनकी एक बेटी थी। उसका नाम आकांक्षा था, वो मुझसे कुछेक माह बड़ी थी.. XXX Hindi खा जाओ आनंद.. क्या मस्त चूचे थे यारों.. मुझे और प्यार करो ना..’वो ऐसे बड़बड़ा रही थी, इससे मेरा जोश बढ़ रहा था। मेरा लंड वापस पूरा तन चुका था। मैं चूमते हुए उसकी नाभि पर रुक गया और उसके इर्द-गिर्द चाटने लगा। आकांक्षा को जैसे होश ही ना रहा.. ये सब शादी के बाद ही मिलेगा।मैंने भी हाँ में हाँ मिलाते हुए, उसे वापस पकड़ लिया और अपने सीने से लगा लिया और उसके बाद अपने हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उसकी चूची मसलने लगा। वो बस आहें भरते हुए मज़े ले रही थी। अब मैंने जानबूझ कर अपना लंड वापस उसकी कॅप्री के ऊपर से ही उसके चूत पर रगड़ दिया।वो कुछ बोले इसके पहले मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया। अब मैं वापस उसके होंठों को चूसने लगा। आकांक्षा भी इससे गर्म होकर अपनी चूत मेरे तने हुए लंड पे रगड़ने लगी। मैं ये देख अपना एक हाथ उसके टॉप में डाल कर ब्रा के ऊपर से उसकी चूची दबाने लगा।अह.. पर कुछ फायदा नहीं हुआ।तभी हमने दूसरे कमरे से कुछ आवाज़ सुनी.. मैं अपने अपने आपको पूरा महसूस कर रही हूँ.. पर कुछ फायदा नहीं हुआ।तभी हमने















