अब कल १२ बजे तक इसका मर्द छूट जाएगा’ वो लोग बोले. मैं बहुत गोरी थी और मेरे काले काले बालों की जुल्फे जब उडती थी मेरे गांव के अच्छे अच्छे मर्द रास्ता चलना भूल जाते थे.मुझे जरा भी भनक नही थी, पर शुरू से ही विशम्भर सिंह की नजरें मेरे रूप रंग पर थी. XXX Hindi और साड़ी के आँचल से मैंने अपना जिस्म और ब्लाउज का वो खुला वाला भाग ढँक लिया.विशम्भर सिंह !! जैसे ही उसने लंड मेरे भोसड़े में डाला, मैं उछल पडी. मैं सारा काम छोड़ के भाग के विशम्भर सिंह के पास देखा. मैं रात में जरा भी सो ना सकी.एक दिल कह रहा था की जमीन के कागज़ उसको दे दूँ, फिर दूसरा दिल कहता था की नही ये बिल्कुल नही नही होगा. मेरी पीठ पर उसके हाथ ही लहरा रहें थे. अपने पति को छुडवाने के लिए मैं दे रही थी. मैंने प्रधान के पैर पकड़ रखे थे. खैर किसी तरह हम गाँववाले जैसे तैसे अपनी जिंदगी काट रहें थे. इससे पहले मैं सिर्फ अपने पति के सामने ही नंगी हुई थी. कुछ रोज पहले जब प्रधान मेरे पास आया तो मैंने उसको खाट पर बिठाया. मैं सारा काम छोड़ के भाग के विशम्भर सिंह के पास देखा. सिर्फ उन्होंने ही मुझे आज तक चोदा खाया था.










