हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” बोलकर मैं चिल्लाई। फिर सोनू अपने होठ लगाकर मेरी बुर पीने लगा और मजा लेने लगा।मैं पूरी तरह से चुदासी हो गयी थी। मैं काम की अग्नि में जल रही थी, मैं खुद ही अपने दूध को अपने हाथ से कस कसकर दबाने लगी। मेरा आशिक सोनू मुझ पर प्यार के सितम और जुलुम कर रहा था। वो मेरी चूत को अच्छे से जीभ लगाकर चूस, चाट और पी रहा था।मैं तो जैसे पागल ही हो गयी थी। फिर सोनू मेरे चूत के दाने को दिल लगाकर पीने लगा और मुझे भरपूर मजा देने लगा। मैं तो जन्नत की सैर करने लगी। मैं तो जैसे चाँद तारो में उड़ रही थी। सोनू मेरे चूत के दाने को दांत से काट काटकर उपर तक खीच लेता था।मेरी चूत में काम की अग्नि प्रजवलित हो चुकी थी। हाँ सच में मैं आज अपने आशिक से कसकर चुदवाना चाहती थी। फिर सोनू ने अपनी उँगलियों से मेरी चूत के होठ खोल दिए और असली चूत मजे लेकर पीने लगा। उसकी खुदरी जीभ मेरी नाजुक चूत में गड और चुभ रही थी। पर मजा पूरा आ रहा था।फिर सोनू ने मेरी चूत में पास रखी सब्जिओं से एक बैगन उठाकर डाल दिया और जल्दी जल्दी बैंगन से मेरी चूत चोदने लगा।“……उई..उई..उई….















