ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मैने भी अंधेरे का फयादा उठाटे हुए अपने हाथ कृति की पैरो पे रख के उसको सहला रहा था, कृति वो दोनो को देख के गरम हो चुकी थी उसने मेरे हाथ रखने का कोई विरोध नही किया। अब मैँ भी अपने आप को कंट्रोल नही कर पा रहा था, मैँने अपना हाथ धीरे से कृति के कपड़े के अंदर डाला.और उसके पेट और धीरे से उसके नाभि पे हाथ फेरने लगा वो और भी गरम हो गयी उसने अचानक से मेरा लंड जोकि खड़ा हो चुका था उसको दबा दिया मेरे मूह से आह की हल्की से आवाज़ निकली क्योकि पैठ के चैन से लंड दबा उसने हाथ हटा दिया, तभी वीनू पूछा क्या हुआ मैने कहा कुछ नही वो पैर मूड गया था, वो फिर से अपनी गर्लफ्रेंड से लग गया।इधर कृति हल्के हल्के हसने लगी, मैने फिर धीरे से कृति के बूब्स को कपड़ो के उपर से ही दबाना चालू किया क्या मस्त टाइट बूब्स से उसके, उसने कुछ नही कहा उसको भी अछा लग रहा था उसके निपल बहुत ही कड़े हो गये थे मैँ उसे मसल रहा था कृति से रहा नही जा रहा था.मैं और जोरो से उसके निप्पल दबाने लगा वो मेरा एक हाथ ज़ोर से दबा रही थी तभी वो सह नही पाई और उसने















