मुझे दूसरा रास्ता भी पता है आपको मनाने का!मौसी कुछ नहीं बोली, अपना काम करती रही। मैं नीचे बैठ कर उनकी टांग पर किस करने लगा और उनकी मांसल जांघों को सहलाने लगा। फिर मैंने अपना मुंह उनकी नाईटी अंदर डाल दिया और धीरे धीरे चूमते हुए उनकी जांघों तक पहुँच गया। फिर मैं मौसी की जांघों को चूमने और चाटने लगा।उनकी मादक आवाज से पूरा किचन गूंज रहा था। मैं पैंटी के ऊपर से ही चूत चाटने लगा। उनकी चूत पनिया कर गीली होने लगी थी। मैंने अपने दोनों हाथ नाईटी के अंदर डाल कर उनकी पैंटी नीचे सरका दी, फिर उनकी चूत को अपनी जीभ से सहलाने लगा।कभी उनकी चूत चाटता तो कभी हाथों से उनकी गांड को मसल देता। बीच बीच में मैं चूत के दाने को जीभ से छेड़ देता तो मौसी चहक उठती। मौसी भी अब मस्त होकर मज़ा ले रही थी, वो अपने हाथ से मेरे सिर को चूत में दबा लगी थी, उनकी सांसें अब तेज़ हो चली थी।उन्होंने दीवार पर बनी अलमारी को हाथ से पकड़ लिया और अपनी टांगों को खोल दिया। मौसी अब आह… य… हम्म… उफ़ जैसी अवाज कर रही थी। मैंने दोनों हाथ पीछे करके उनकी गांड को जकड़ लिया और उनकी चूत चाटता रहा। थोड़ी देर में मौसी ने झड़ना शुरू कर दिया, उनकी चूत से रस की नदी















