गांव की देसी बहू की गर्म गांड का मजा

सौम्या ने पूछा।करना क्या है। तुम्हारे ही शहर के एक कॉलेज में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन दिया है। यदि मिल गई तो पढ़ाई, नहीं तो खेती तो है ही। वही करूंगा। सुजीत ने जवाब दिया।तुम्हें छात्रवृत्ति जरूर मिलेगी। आखिर तुम्हें शहर जो आना है। आखिर मेरी और मेरी चूत की जरूरत कौन पूरी करेगा। यह कहकर सौम्या खिलखिलाकर हंस पड़ी।सुजीत ने कहा तुम्हें मजाक सूझ रहा है और यहां मैं चिंता में हूं कि पता नहीं क्या होगा?कुछ नहीं होगा, सब ठीक हो जाएगा। सौम्या ने कहा।अच्छा मैं चलती हूं। मोना उठ गई होगा। सौम्या ने कहा और चलने लगी।सुजीत बोला कल आओगी न। आज की तरह धोखा तो नहीं दे जाओगी।सौम्या अगले दिन आने का वादा करके वहां से चली गई। अगले दिन दोपहर को जब वह वहां पहुंची तो सुजीत नहीं मिला। उसने घर के सारे कमरे छान मारे लेकिन सुजीत का कहीं पता नही था। अंत में वह मन ही मन बड़बड़ाती हुई वहां से चली गई। वह चूत मरवाने के बारे में जाने क्या-क्या सोच कर वहां गई थी।सुजीत के न मिलने से उसके सारे मंसूबो पर पानी फिर गया। मौसी के घर आ कर वह मोना के कमरे में लेट गई। डबलबेड बिस्तर पर पास ही मोना सो रही थी। अचानक सौम्या को एक ख्याल आया और उसने अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल और मोना

गांव की देसी बहू की गर्म गांड का मजा

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