कुछ दिन में ही वो मेरी इस झिझक को समझ गईं. वो भी रोज वहां वाक पर आती थीं. XXX Hindi कोई पांच मिनट में ही वो फिर से गरमा गईं और बोलने लगीं कि ये सब बाद में तुम खूब कर लेना मेरी जान… मगर अभी एक बार प्लीज मुझे चोद दो. फिर मैंने आंटी को लिटा दिया और उनकी टांगों को फैला कर उनकी चूत की चाशनी को चाट कर चखा. मैं भी उनके शरीर के स्पर्श कर मजा ले रहा था और उन्हें बता रहा था. आंटी भी मुझसे नागिन सी लिपट गईं और मेरे बदन में सनसनी दौड़ने लगी. आंटी भी मुझसे नागिन सी लिपट गईं और मेरे बदन में सनसनी दौड़ने लगी. मैं आंटी को जोर जोर से… तो कभी धीरे धीरे पेल रहा था.पूरी चुदाई को तीन तरह के पोज़ में अंजाम दिया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.तभी आंटी ने पूछ लिया- तुम मुझे वाक में क्यों घूरते रहते हो.उनकी इस बात से मैं एकदम से सकपका गया. मैंने कहा- जान आज तुम्हें पूरा मजा दूंगा.वो गिड़गिड़ाने लगीं- मजा बाद में देते रहना. उनकी सहमति मिलते ही मैं तो मानो चूत पर पिल पड़ा… फिर एक जोर के झटके के साथ उनके अन्दर झड़ गया और उनके ऊपर ही ढेर हो गया.















