तुम तो बस सपना देख रही हो! – इंडिया समर, क्लो फोस्टर

गर्मी की छुट्टियों में चाचू मुझे शहर बुला लिया करते थे। मुझे भी उनके पास बहुत अच्छा लगता था। चाची मुझे बहुत प्यार करती थी। उन्हीं की मेहरबानी से मेरे पास एक मंहगी मोटरसाईकल और एक बढ़िया सेलफोन भी था। इसलिये मुझे यह भी आशा रहती थी कि चाची मुझे कुछ ना कुछ तो दिला ही देगी। Nazuk Badanमेरा और चाची का प्यार देख कए चाचू भी बहुत खुश थे। मैं तो अब कॉलेज जाने लगा था। बड़ा हो गया था। चाची की आसक्ति भरी नजरे मैं पहचानने भी लगा था, हांलाकि वो मुझसे पन्द्रह वर्ष बड़ी थी। अक्सर वो मेरे नहाने के समय मुझे तौलिया देने आ जाती थी और मुझसे छेड़खानी भी करती थी।मुझे सच कहूँ तो बड़ा ही आनन्द आता था। वो मेरा लण्ड खड़ा कर जाती थी। फिर मुझे मुठ मारनी ही पड़ती थी। मैंने चाची के नाम की बहुत बार मुठ भी मारी थी। मैं भी उन्हें पूरा मौका देता था कि वो मेरे अंगों को छू लें और मेरे साथ मस्ती करें। इसी मस्ती के दौरान चाची ने एक बार मेरे कसे हुये चूतड़ों को सहला भी दिया था और बोली थी- तेरे चूतड़ तो बहुत कसे हुये और सख्त हैं !तब मैंने जल्दी से चाची के चूतड़ दबा दिये कहा- हाय चाची, आपके तो बहुत नरम हैं !धत्त, बड़ा शरारती है रे तू तो !

तुम तो बस सपना देख रही हो! – इंडिया समर, क्लो फोस्टर

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