लेकिन मैं उन्हें खोना नहीं चाहती थी… सिर्फ एक बार ही की तो बात है। यह सोचकर मैं पापा से अलग हुयी और तिवारी अंकल के पास चली गई।खुशबू मुझे अपनी ओर आती देख अपने पापा के ऊपर से उठी और मुस्कुराती हुई मेरे पापा की ओर बढ़ गई। तिवारी अंकल बिस्तर पर उठ बैठे और मुझे देखते हुए अपने लंड को सहलाने लगे, मैं उनके पास बगल में जाकर बैठ गयी।“इसे मुंह में लो शोभा…” वो लंड हिला कर बोले।मैं झिझक के साथ उनके विशाल लंड को देखती रही। अचानक अंकल ने मुझे गरदन से पकड़ा और अपने लंड पर झुका लिए फिर एक हाथ से अपना लंड पकड़कर मेरे होंठों पर रगड़ने लगे। फिर अपने लंड के सुपारे से मेरे होठों को खोलने लगे लेकिन वो नाक़ाम रहे।अचानक उन्होंने मेरा गर्दन दबा दिया मैं चीखी… उसी वक़्त अंकल ने मेरे खुले मुंह में अपना लंड घुसा दिया। मुझे न चाहते हुए भी उनका लंड चूसना पड़ा, मैं धीरे धीरे उनका लंड चूसने लगी। तभी अचानक अंकल उठे और घुटनों के बल बिस्तर पर खड़े हो गये, फिर मुझे अपनी टाँगों के बीच खींच लिया, मैं उनकी टाँगों के नीचे पीठ के बल लेटी हुई थी।उन्होंने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थाम कर ऊपर उठाया और अपना मोटा लंड मेरे मुंह में डाल कर मेरा मुंह में पेलने लगे। तिवारी अंकल















