कुछ देर उनके ऊपर ऐसे ही पड़ रहने के बाद मैं हल्की सी ऊपर हुई तो अभिषेक ने मेरे माथे पर एक मीठा प्यार भरा चुम्बन दिया, पूछने लगे, “अब मैं जाऊँ, इजाजत है क्या?”मैंने दीवार घड़ी की तरफ देखा और हंसने लगी, “हा… हा… हा… हा…”“हंस क्यों रही हो?” अभिषेक ने पूछा।“जनाब एक बजकर बीस मिनट हो चुके हैं और आपकी गाड़ी तो पक्का चली गई होगी।”अभिषेक ने तुरन्त दीवार घड़ी की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगे बोले, “आखिर तुमने मुझ पर अपना जादू चला ही दिया।”“किसने किस पर जादू चलाया ये तो भगवान ही जानता है।” मैंने हंस कर कहा।अभिषेक फिर से मेरे स्तनों से खेलने लगे।“आह… बहुत दर्द है।” अचानक मेरे मुँह से निकला।अभिषेक मेरी तरफ देखकर पूछने लगे, “तुम्हारी शादी को 12 साल होने वाले हैं और तुम दोनों रोज सैक्स भी करते हो तब भी आज तुम्हारे स्तनों में दर्द क्यों होने लगा?”“वो कभी भी इनसे इतनी बेदर्दी से नहीं खेलते।” बोलते हुए मैं उनके ऊपर से उठ गई।“ओह…” अभिषेक के मुँह से निकला। शायद उनको अपनी गलती का अहसास होने लगा।मैंने पास ही पड़े छोटे तौलिये से अपनी रिसती हुई योनि और अभिषेक के बेचारे निरीह से दिख रहे लिंग को साफ किया और बाथरूम में धोने चली गई। अभिषेक भी मेरे पीछे पीछे बाथरूम में आये और पानी से ‘सबकुछ’ अच्छी तरह















