हा… तुजे मेरी परवाह नहीं करनी है… ठीक है, मेरे पहले प्यार का पहला अनुभव है… उसे जो पसंद हो वही होगा…भाभी ने मेरी निक्कर निकाली… और साँप जैसा मोटा लंड…भाभी: ह्म्म्म्म तो ये जनाब है… जिसको खुश करना है मेरे पुरे बदन को…मैं: जी हा… चलो अब घुटने टेको इसके आगे… एक औरत का कर्तव्य निभाओ…भाभी: ओके… वैसे भी अब तू है तब तक मैं अपना वीर्य तेरे मुह, चूत या गांड में ही निकलूंगा, वेस्ट तो करूँगा ही नहीँ… और हां कंडोम कभी नहीं पहनूंगा…भाभी: बाद का बाद में… आज तो तू लाता तो भी मैं तुजे नहीं पहनने देती… पहली बार कोई कंडोम थोड़ी पहनता है?मेरी निक्कर पूरी तरह से निकाल के मेरे लण्ड को हाथ में लिया… ठण्डी ठण्डी मुलायम हाथ वाली मुठ्ठी में मेरा लण्ड, आज तक का सबसे सुखद अनुभव… लगा अभी जड़ ना जाउ… पर काबू किया… भाभी ने अपने मुलायम होठो से मेरे लण्ड से दोस्ती करनी शुरू की… मैं थोडा उकसाया हुआ भाभी के मुह में धसने की कोशिश कर रहा था….भाभी: अरे सबर करो… मुह में लेना है पर दोस्ती तो करने दो…भाभी मुझे परेशान कर रहे थे… पर उसने जैसे ही अपना मुह खोला के मैंने जट से गीले मुह मैं अपना टोपा घुस दिया… उसने स्वागत किया इस हमले का… शायद पता ही था के मैं अब ये करूँगा… मैं















