आह्ह.. हिंदी XXX चल नाटक मत कर चुपचाप कमरे में आजा, मेरा बहुत मन कर रहा है तेरी गाण्ड मारने का.. चुपचाप चुद गई होती और क्या चूतिया बनाया बेचारे को।मैंने बिना कुछ बोले पापा के लौड़े को मुँह में ले लिया और चूसने लगी।पापा- अरे जान ऐसे ही शुरू हो गई.. चुपचाप चुद गई होती और क्या चूतिया बनाया बेचारे को।मैंने बिना कुछ बोले पापा के लौड़े को मुँह में ले लिया और चूसने लगी।पापा- अरे जान ऐसे ही शुरू हो गई.. चुपचाप बता समझी…इस बार पापा के तेवर एकदम बदल गए थे, उनकी आँखों में गुस्सा आ गया था और पापा का गुस्सा मैं खूब जानती थी कि अगर वो मारने पर आ गए तो हालत खराब कर देंगे।विनीता- हाँ.. मैं सब बताता हूँ.. उहह ले आहह…मुझे बहुत मज़ा आ रहा था उसके धक्कों से मेरी चूत की आग बढ़ने लगी थी मगर वो कच्चा खिलाड़ी था। अचानक उसने रफ्तार बढ़ा दी और 2 ही मिनट में उसके लौड़े ने रस छोड़ दिया। अब वो निढाल सा होकर मेरे पास लेट गया। मेरी चूत की आग चरम पर थी..मैंने जल्दी से अपनी ऊँगली डाल कर चूत को ठंडा करना चाहा, मगर ऐसा करना ठीक नहीं था वरना सौरव को शक हो जाता। मैं उसके पास ही लेट गई और उसकी नजरों से बचा कर एक हाथ से चूत को रगड़ने लगी।सौरव- उफ़















