उसके बाद दुष्यंत भी उसकी बगल मे आकर लेट गया…और दोनो एक दूसरे के होंठों को चूस्कर अपना-2 रस खुद ही चखने लगे.. दुष्यंत की नज़रें उसके चेरहरे से होती हुई नीचे तक आई….उसकी क्लिवेज उफन कर बाहर आ रही थी…इतना गहरा गला तो उसने आज तक नही देखा था अपनी बहन का…ऐसा लग रहा था जैसे उसने जान बूझकर अपने मुम्मे बाहर की तरफ निकाले हैं, ताकि दुष्यंत उन्हे देख सके.अर्पिता ने उसकी नज़रों का पीछा किया और बोली : “एक नंबर के बदमाश हो तुम….मैने तो पहले सोचा भी नही था की तुम ऐसे होगे…पर पिछले 2-3 दिनों से जो भी तुम्हारे बारे मे पता चल रहा है,उसके हिसाब से तो तुम बड़ी पहुँची हुई चीज़ हो…”दुष्यंत ने अपना हाथ आगे करते हुए अर्पिता की कमर को लपेटा और उसे अपनी तरफ करते हुए खींच लिया…वो आगे की तरफ होती हुई उसकी छाती पर गिर गयी…और अब अर्पिता का चेहरा सिर्फ़ 2-3 इंच की दूरी पर ही था…दोनों की साँसे टकरा रही थी आपस मे.. XXX Hindi उसके दोनो बूब्स को वो अपनी छाती पर महसूस कर पा रहा था..उसके जिस्म से आ रही खुश्बू को वो सूंघ कर मदहोश सा हुए जा रहा था..















