और बोली,” ओह्ह्ह गौड़ड़ड़ !……ऑउच……….अह्ह्ह…. मैं कह रही हूँ आज तो कर लो पर फिर कभी कंडोम के बिना मत करना.”अशोक ने मुस्कुराते हुए कहा,”बहुत शरारती हो तुम.”और फिर अपना ठीला होता लौड़ा एक बार फिर से दीपाली के मुंह में दे दिया और दीपाली फिर से उसे चूसने लगी और 1 मिनट के अंदर ही फिर से एक दम कड़क लंड बना दिया. हिंदी XXX अब मुझे सिर्फ इस बात का इंतज़ार था कि क्या दीपाली ने ये सब मुझे ये कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने कि लिए किया है?इतने में दीपाली वापिस आई और अशोक ने उठ कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और लगा दीपाली के होंठ चूसने. दीपाली की कमर और सुन्दर चूतड़ मेरी और थे. ये मेरे सेफ डेज भी नहीं हैं,प्लीज़ अशोक मान जाओ !अशोक बोला,” सिर्फ एक बार कह दो तुम्हारा मन नहीं है मैं कुछ नहीं करूँगा.”दीपाली ने शर्माते हुए कहा,”मन तो बहुत है अशोक लेकिन बिना कंडोम के खतरा है,कहीं कुछ गडबड न हो जाये.”अशोक ने कहा ,” दीपाली चिंता मत करो, तुम्हारे अंदर नहीं छोडूंगा ,पक्का जेंटलमैन प्रॉमिस.”और ये कह कर दीपाली के होंठ चूसने लगा. मैंने सलीके से अपनी कार उन दोनों ट्रकों और वन के बीच खड़ी कर दी और जल्दी से कूड़े के ढेर में से होता हुआ साथ वाली बन रही बिल्डिंग के पिछले हिस्से से अन्दर घुस गया और सीढ़ियों से















