मेरी पजामी दो न। सर्वेश ने हड़बड़ाते हुए मेरी पजामी मुझे दे दी। सर्वेश के सामने ही मैंने अपनी पज़मी चूत छुपाते हुए ऊपर चढ़ा ली लेकिन अपनी गुदाज़ जांघें पूरी खोलकर सर्वेश को दिखलाईं। सर्वेश ललचाई नज़रों से मेरा बदन देख रहा था।सर्वेश को देखकर मैं मुस्कराई और शीशे के सामने जाकर खड़ी हो गई। शीशे में अपने को देखकर मैं चकित रह गई, मेरे गोल-गोल गीले स्तन और चुचूक कुरते में से बिल्कुल साफ़ दिख रहे थे। मैं समझ गई कि सर्वेश इतना घूर घूर कर चूचियाँ क्यों देख रहा है, अगर मेरे पति इतना देख लेते तो मुझे अब तक नंगा करके मेरी चूत में लंड डाल चुके होते।सर्वेश को मैंने आवाज़ लगाई और बोली- सर्वेश, इधर आओ!सर्वेश मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया।“अपनी भाभी को एक मीठी पप्पी दे दो न!” मैंने उसके हाथ पकड़ कर अपनी कमर मैं डलवा लिए।सर्वेश गर्म था, उसने पूरा अपना लोड़ा मेरी गांड की दरार से छुलाते हुए मेरे गालों पर एक पप्पी दे दी और हटने लगा।मैंने उसे प्यार से डांटा- इतना क्यों शर्मा रहे हो? हिंदी XXX आधे घंटे बाद दरवाज़ा खोल दूंगी।मैं और सर्वेश कमरे के अंदर आ गए, उसमें सिर्फ एक बल्ब था और एक तख्त पड़ी हुई थी। बगल वाले कमरे से चुदाई की आवाजें आ रही थीं। आंटी ने बाहर से सांकल लगा दी। मैं चुदने के लिए















