उसकी सफेद ब्रा ब्लाउज के बाहर से नजर आ रही थी, पतले पतले हाथ में उसने कुछ चूड़ियाँ पहनी हुई थी जो पुरानी थी, मेने उसके पैर देखे वो काले गंदे फटे हुए थे जिसमे उसने पुरानी पजेब पहन रखी थी..ढीला सा बदन, ढीले से स्तन, ढीली साड़ी पहने हुए वो मेरे लिए गन्ने का जूस निकाल रही थी, उसमे से कोई आकर्षण नही झलक रहा था लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों मेरा लण्ड उसे देखकर खड़ा था और मेने प्रतिज्ञा ली हुयी थी की इसे पटाकर जरूर चोदूंगा, उसने मुझे गन्ने का जूस दिया.मैं- आज अंकल नही है, कहीं गए हैं क्या?गन्ने के जूस वाली- हाँ आज मजदूरी में गए हैं.मैं- नाम क्या है तेरा?गन्ने के जूस वाली- रेखा, क्यूँ पूछ रहा है?मैं- मन किया पूछने का, नाम नहीं पूछ सकता क्या?रेखा- तुझे क्या मतलब, तू जूस पी बस.मैं- गुस्सा क्यों होती है आंटी. ऐसी औरत किसी को भी पसंद न आये लेकिन मैं बहुत ही हवसी किस्म का हूँ, मुझे लगा एक बार इसका अनुभव लेना चाहिए. XXX Hindi यहाँ से 2 किलोमीटर दूर नाला बस्ती में रहते हैं हम.मैं- तेरी हालत ऐसी क्यूँ हो रखी है आंटी, बीमार सी लगती है तू.रेखा- बीमार नहीं हूँ, गरीबी ने ऐसा बना दिया है.मैं- चल मैं 1 गिलास जूस के आज से 40 रु दूंगा तुझे रोज.रेखा- ऐसा क्यों रे, मेरा आदमी गुस्सा















