और इसी बाऊन्ड्री-वॉल के पास, Desi Thriller Sex Kahani“चलें….”-एक फुसफुसाती आवाज।“पहले बीड़ी तो खत्म होने दे….”-दूसरी मध्यम आवाज।लगभग एक मिनट बाद,“चल….”दोनों ने पारदर्शी मास्क पहना और बाऊन्ड्री-वॉल के ऊपर चढ़ गये।“कूदूं…..”“हर चीज पूछ कर करेगा क्या….कूद..”‘धप्प्’‘धप्प्’दोनों लॉन के किनारे ऊँगी झाड़ियों में उलझे पड़े थे।“तेरी माँ का चोदू साले ……तुझे यही जगह मिली थी कूदने के लिये!”“गलती हो गई भाई…..दिन में तो निशान लगया था लेकिन बारिस की वजह से…..”“चुपकर…..”दोनों जैसे-तैसे झड़ियों से आजाद हुये। लॉन में ऊगी घासों को कुचलते हुये वो बंगले के ठीक पीछे पहुँचे।“वो रस्सी कहाँ है?”“सुबह तो इधर ही झूल रही थी….”“साले…..तो क्या तेरी बहन के भोषड़े में घुस गई…..”“लगता है बंगला रंगने वाले ले गये….”“अब क्या तेरी झाँट पकड़ कर ऊपर चढ़ू….कुछ सोच….”दोनों के बीच एक पल मौन पसरा रहा।“वाटर पाईप से भी तो …..”“सोचता है, पर देर से…..थोड़ा जल्दी सोचना सीख…..”स्ट्रीट लाइट की रोशनी में वो दोनों साये जैसे नजर आ रहे थे।“पहले मैं जाता हूँ….”“तो जा…..”लगभग पाँच मिनट बाद दोनों छत पर थे।“दरवाजा किधर है?….”“उस तरफ….”उसने ऊँगली से इशारा किया। दोनों दरवाजे के पास पहुच कर ठिठके।“टार्च जला….”‘टिक्क्’रोशनी चमकी।“भोषड़ी के…..चेहरे पर नहीं, लॉक पर…”टॉर्च का फोकस दरवाजे के लॉक पर जाकर ठिठका। एक चमकीला तार दरवाजे के लॉक में दाखिल हुआ।‘किर्र….कर्र…कट्ट्….’दो मिनट पश्चात्,“खुल गया….टॉर्च बुझा….”पुनः अँधेरा व्याप्त हो गया। स्ट्रीट लाइट की रोशनी यहाँ भी हल्की मात्रा में बिखरी हुई थी।“दरवाजा बंद कर दूँ?….”“भूतनी















