में उसके नंगी पीठ पर हाथ फैरता, कभी उसकी कमर पर हाथ फैरता और बीच में प्यार से उसके बूब्स भी दबाता..जिससे उसका दर्द मज़े में बदल गया और अब में उसकी चूत में अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर अंदर बाहर करने लगा लेकिन सुनन्दा की चूत बहुत टाईट थी.. हिंदी XXX तो मुझे भी अब कुछ देर बाद शरारत सूझने लगी और में सुनन्दा के पीछे चुपके से जाकर अपनी दोनों हाथ की उंगलियों से सुनन्दा के पेट पर दबाता. थकावट के कारण हम एक दूसरे से बात भी नहीं कर पा रहे थे और हम वैसे ही नंगे एक दूसरे की बाहों में सो गये. मेरा लंड भी सिकुड़कर सुनन्दा की चूत के बाहर निकल गया. उसके बाद हमारे माता, पिता के आने तक हमने चुदाई का सिलसिला शुरू ही रखा और माता, पिता आने के बाद हम नॉर्मल व्यहवार करने लगे भाई बहन की तरह. हमारे माता, पिता दोनों ही किसी शादी में दो दिन के लिए बाहर गये थे. जिसकी वजह से सुनन्दा बहुत गरम होकर पैर मारने लगी. सुनन्दा मेरे साथ अधिकतर बिना बाह की कमीज़, सलवार में ही रहती थी और हम चिपककर बात करते रहते है और मुझे उससे चिपकना बहुत अच्छा लगता है. और वो झट से उछलती और इस तरह हमारा एक दूसरे के साथ गुदगुदी करना शुरू हुआ.हमने एक दूसरे को















