भैया के हाथ आंटे कि तरह चूचियों को गूंद रहे थे !साड़ी भी उतार ली थी माधुरी ने, और पेटीकोट को भैया ने उतार दिया ! कब नींद आ गई पता ही नहीं चला ! हिंदी XXX कितने माहिर थे भैया ! कितने माहिर थे भैया ! सुबह ही मैं तुम्हारी करतूत तुम्हारी माँ और रखैल दोनों को बताऊंगा !(भैया गुस्से में आ गए थे, पर मैंने आराम से बात करने को कहा, और हाँ करने को कहा )भैया : देखो माधुरी, जो भी मैंने किया, तुम्हारे बच्चे के लिए किया, लेकिन मेरा मन नहीं मानता तुम्हारे साथ अब ये सब करने को !माधुरी : राजा मैं नहीं रह सकती तुम्हारे बिना ! सुबह पूरा उजाला होने का एहसास हुआ, तो उठने की कोशिश की, पर अभी भी भैया का लण्ड पूरी तरह से मेरी चूत में भरा था !मैंने धीरे धीरे निकलने की कोशिश की, भैया सोते हुए बहुत अच्छे लग रहे थे !हलके हलके आगे पीछे करते करते मैंने लगभग चुदाई का ही मज़ा ले लिया, जोश इतना आ गया की चूत ने पानी छोड दिया, फिसलन में लण्ड बाहर ! मेरी ब्रा,पैंटी, पेटीकोट और साड़ी, भैया के वीर्य से लथपथ थे, कहीं कहीं खून के क़तरे मेरी सील टूटने कि गारंटी दे रहे थे!मेरी चूत का मुंह खुल गया था, लग रहा था कि मेरा पूरा हाथ अंदर आराम से चला















