माआआआआआआअ…… मैं पानी छोड़ रही हूँ।”स्वामीजी ने भी अपना बदन कड़ा किया मैं समझ गयी वो भी झड़ने वाले है। फिर अचानक मुझे मेरे पेट के अंदर गरम पानी भरने जैसा महसूस हुआ और में समझ गयी की वो मेरे अंदर ही झड़ गये हें। झड़ने के बाद वो मेरे ऊपर ही कुछ देर लेटे रहे। फिर वो मेरे उपर से उठे और बाथरूम में चले गये। मुझे अंदर से पानी की आवाज़ आ रही थी।थोड़े टाइम बाद स्वामी जी नहा धो के बाथरूम से बाहर निकले। मुझे वैसा ही छोड़ के वो खुद कपड़े डाल के बाहर चले गये और में वहाँ अंदर नंगी लेटी हुई थी। मुझे पता ही नही चला की कब मेरी आँख लग गई। जब मुझे होश आया तभी भी मेरा सर घूम रहा था। पर अब में अपने हाथ पैर मूव कर पा रही थी।मेरे दोनों पेरो में दर्द हो रहा था। शरीर अकड़ गया था। दिल कर रहा था की कोई मुझे मालिश कर देता मगर वहाँ ऐसा कौन मिलता। मैं अपनी हालत पे रो रही थी। मुझे ये भी होश नही था की मैं उस वक़्त तक नंगी ही थी। मैने अपनी योनि को सहलाया तो दर्द से बहाल हो गयी।योनि के लिप्स फुल गये थे और दर्द भी था, योनि के ऊपर स्वामीजी का चिप चिपा सा वीर्य था जो बहुत हद तक















