लाओ मुझे दो।”उठकर अरुण के लिंग को खींचकर अपने मुँह में ले लेती है। मैं ऐसी जगह पहुँच गई हूँ जहाँ उसे यह करते देखकर गुस्सा भी नही आ रहा।छवि कुछ देर तक लिंग को चूसकर पूछती है,”अब तैयार हो ना? “अरुण, दरवाजा खोलो।”मनीष उसके हॉस्टल से आया था। उसको मालूम था कि अरुण यहाँ है। किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे। लड़कियों के कमरे में लड़का घुसा हुआ और दरवाजा बंद? हिंदी XXX तुम तो फँसे हुए हो।” मनीष ने कहकहा लगाया, “फँसे नहीं, धँसे हुए…..”छवि ने बड़े अभिभावक की तरह हस्तक्षेप किया, “मनीष, तुम अरुण की जगह लो। अरुण को फ्री करो।”क्या ????हैरानी से मेरा मुँह इतना बड़ा खुल गया। छवि यह क्या कर रही है?मनीष ने झुककर मेरे खुले मुँह पर चुंबन लगाया, “अब शोर मत करो।”उसने जल्दी से बेल्ट की बकल खोली, पैंट उतारी। चड़ढी सामने बुरी तरह उभरी तनी हुई थी। उभरी जगह पर गीला दाग।वह मेरे देखने को देखता हुआ मुसकुराया, “अच्छी तरह देख लो।” उसने चड्डी नीचे सरका दी। “यह रहा, कैसा है?”इस बार डर और आश्चर्य से मेरा मुँह खुला रह गया।वह बिस्तर पर चढ़ गया और मेरे खुले मुँह के सामने ले आया,”लो, चखो।”मैंने मुँह घुमाना चाहा पर उसने पकड़ लिया,”मैंने तुम्हारा वाला तो स्वाद लेकर खाया, तुम मेरा चखने से भी डरती हो?”मेरी स्थिति विकट थी, क्या करूँ, लाचार















