ये क्या होता है???”“अरे तुम इतना भी नहीं जानते?” वो झुंझला कर बोली।मैं अपने माथे पर अँगुली ठोंकता हुआ सोचने के अंदाज़ में बोला… “कोई एक्सरसाइज़ है क्या?”वो मुस्कुराने लगी और बोली… “हाँ, एक तरह की एक्सरसाइज़ ही है…”“अरे डॉक्टर!” मैंने कहा… “अब दुकान में कहाँ कसरत-वसरत करूँ?”वो हँसने लगी और बोली… “क्या तुम सचमुच मास्टरबेट नहीं जानते?”“नहीं डॉक्टर!”“क्या उम्र है तुम्हारी?”“उन्नीस साल!”“अब तक मास्टरबेट नहीं किया?”“आप सही तरह से बताइये तो सही… कि ये आखिर है क्या?”“अरे जब…” वो फिर झेंप गयी और बगलें झाँकने लगी और फिर अचानक उसे कुछ याद आया और वो झट से बोली… “हाँ याद आया… मूठ मारना… क्या तुमने कभी मूठ नहीं मारी…?”मैं सोचने लगा… और फिर कहा, “नहीं… मैं अहिंसा वादी हूँ… किसी को मारता नहीं…!”“पागल हो तुम…” वो फिर हंस पड़ी… “या तो तुम मुझे उल्लू बना रहे हो… या सचमुच दीवाने हो…!”मैंने फिर अपने चेहरे पर दुखों का पहाड़ खड़ा कर लिया। वो मुझे गौर से देखने लगी। शायद ये अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रही थी कि मैं सच बोल रहा हूँ या उसे बेवकूफ बना रहा हूँ। फिर वो गंभीर हो कर बोली… “ये बताओ… जब तुम्हारा पेनिस खड़ा हो जाता है और तुम अकेले होते हो… बाथरूम वगैरह में… या रात को बिस्तर पर… तो तुम उसे ठंडा करने के लिये क्या करते हो?”“ठंडा करने के लिये???”“हाँ… ठंडा करने















