आआआआ………….. XXX Hindi शायद ये मेरे लिए हरी झण्डी थी। मैं कमरे में अन्दर चला गया।कविता बोली- अरे अजय, मैंने अभी कपड़े नहीं, पहने तुम बाहर जाओ !मैं बोला- कविता, मैंने तुम्हें कपड़ो में हमेशा देखा, लेकिन आज बिन कपड़ों के देखा है, अब तुम्हारी मर्ज़ी है, तुम मेरे सामने ऐसे भी रह सकती हो!और यह कहते हुए मैंने उनको बाहों में ले लिया। उन्होंने थोड़ी सी ना-नुकर की लेकिन मैंने ज्यादा सोचने का समय नही दिया और बिंदास उनको चूमना शुरू कर दिया। मैंने देखा कि कविता ने आँखें बंद कर ली हैं। इसमें उनकी सहमति छुपी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मैं दस मिनट तक उसे चूमता रहा। इस बीच मेरे गरम होंट उसके गोरे बदन के ज़र्रे ज़र्रे को चूम गए। अचानक कविता ने मुझे जोर से धक्का दिया और मैं नीचे गिर गया। एक बार को मैं फ़िर डर गया लेकिन अगले ही पल मैंने पाया कि कविता मेरे ऊपर आकर लेट गई और मेरे सारे कपड़े उतार दिए।हम दोनों के बीच से कपड़ो की दीवार हट चुकी थी। मेरा लंड पूरी तरह तैनात खड़ा था। तभी उसने मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपने नरम होंटों से छुआ और अपने मुँह में ले लिया। वो मेरे ऊपर इस तरह बैठी थी कि उसकी चूत बिल्कुल मेरे होंठों पर आ टिकी थी।मैंने चूत को















