और कह रही थी कि “पल्लवी, प्लीज़ थोडी देर और सह ले फिर देख तुझे कितना मज़ा आता है”।मैं पड़ी पड़ी अपनी दीदी के द्वारा अपना साथ जबरदस्ती होते देख रही थी, मेरी चूत कि झिल्ली बुरी तरह फट चुकी थी और उससे खून बह कर बिस्तर पर आ रहा था। और मैं सुबकती हुई अपनी चूत का हाल देख रही थी। थोडी देर में ही सच में मुझे इसमें भी काफी आनंद आने लगा और मैं दीदी से और जोर से करने के लिए कहने लगी। दीदी के चेहरे पर भी मुस्कान खिल गयी और वो भी बड़ी कुशलता से उस मोमबत्ती से मेरी चुदाई करने लगी।मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था और थोडी देर में मैं भी सिसकारियाँ लेते हुए झड़ गयी। जब ये सेक्स का खुमार थोडा कम हुआ तो अहसास हुआ कि इस खेल खेल में मैं अपना कोमार्य लुटा चुकी हूँ और अब मैं एक कुंवारी लड़की नहीं रही। ये ध्यान आते ही मैं रोने लगी। मुझे परेशान देख कर दीदी को भी अच्छा नहीं लग रहा था.और वो मुझे समझा रही थी कि “ऐसा कुछ नहीं है पल्लवी, आज कल तो अधिकतर लोग शादी से पहले ये सब कर ही लेते हैं”। मैंने दीदी से कहा कि तुमने तो कभी कुछ नहीं किया और मुझे कह रही हो कि कोई बात नहीं। ये सुन कर















