कहते हुए ढक्कन की तरह खुल गया। उसकी आँखें चढ़ गयी थी, वो बड़ी देर तक अपनी चूत सहलाती रही। इसी बिच मैं अंदर घुस गया। मैंन कुछ ना देख पाने का नाटक करने लगा।“ओह …..सोरी आंटी!!” मैंने उसके नंगे जिस्म को देखकर कहा और फिर बाहर जाकर खड़ा हो गया।“आंटी किराया लाया हूँ!!” मैंने बाहर से ही आवाज लगाई.आनन फानन में मेरी चुदासी मकान मालकिन से किसी तरह अपनी साडी पहनी और मुझे अंदर बुलाया। वो हमेशा बड़े ताव में रहती थी, पर आज उसका काण्ड मैंने अपनी आँखों से देख लिया था, शायद तभी तो मेरे साथ किसी सीधी औरत की तरह पेश आ रही थी, वरना थी वो बड़ी चंट आत्मा।“उमेश!…. हिंदी XXX हमममम अहह्ह्ह्हह.. उंह उंह उंह हूँ.. ओह्ह्ह्ह माँ… अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह…. अई…अई….अई……बेटा उमेश….हूँ….अब मुझे चोदो बेटा….अब कितनी देर लगाओगे??” मकान मालकिन बड़ी बेचैनी से बोली.“ठहर जा आंटी……ठहर जा….मेरे पर विश्वास कर। ना तो मैं कहीं भागा जा रहा हूँ और ना ही तू कहीं भागी जा रही है!!…..आराम से चोदूंगा तुमको….मस्ती से चोदूंगा!!…फुल मजा आएगा गारंटी मेरी है, बस तुम मेरा किराया माफ़ कर देना पैसे की बड़ी तंगी है!!” मैंने कहा.और मैं आंटी की चूत पर पहुच गया। अभी १ घंटे पहले मैंने आंटी की बुर के दर्शन कर लिए थे, अब बिलकुल पास से देखने जा रहा था। मैं कुछ देर तक मकान मालकिन आंटी का भोसड़ा















