और जब मैं 22 वर्ष का हुआ तो पहली बार गाँव देखने और भ्रमण करने की जिज्ञासा हुयी तो ग्रीष्मावकाश के समय मेने दिल्ली से असम प्रस्थान किया. तभी चाची ने अपनी नाईटी अपने पेट तक उठा दी और अपनी मनमोहक बालों से लबालब भरी हुई फुद्दी के दर्शन करवा दिए. XXX Hindi करीब एक महीना गाँव में रहकर मेने चाची की खूब चुदाई करी. मैं गाईय्य्य्य्य.. मैं चाची के उरोजों पर झपट गया और निप्पल चूसने लगा और बूब्स कस कस कर दबाने लगा. अपने दोनों पैरों को मेरी पीठ से बांधें, होठ से होठ मिलाये हुए, कामाग्नि में डूबी चाची मेरे बालों को खींचते हये चुदाई का आनंद ले रही थी. और फिर शुरुआत हुई धक्के पर धक्के की, आक्रोश और ज्वाला से भरा मेरा सपोला अपनी ही चाची के बिल की यात्रा कर रहा था. अब मेरी आँखों के सामने चाची की झाँटों से छिपी हुई चूत पुकार रही थी- “सात्विक, भतीजे आओ, जल्दी आओ, और चाटो, जी भर कर रसपान करो, फाड़ डालो, चोद डालो, कच्चमर बना डालो, चटनी बना दो भतीजे”.मैं- वाव चाची, इतनी बड़ी झाँटें, और चमड़ा, वाव.चाची- भतीजे, असली सुरंग तो अंदर है, ये तो द्वार है मेरे लाल.मैं अपने कांपते हुए हाथों से झाँटों को हटाकर, चाची की चूत के चमड़े रूपी द्वार को दो उँगलियों से खोलता हूँ तो लाल रंग का गर्म हुयी भट्टी















