रोटी और दाल चावल खाते है, फिर आखिर क्यूँ उनको मेरी माँ के दूध पीने की जरुरत पड गयी.दूध तो वो लोग पीते है जिनके मुँह में दांत नही होते, फिर जीतेन्द्र अंकल को मेरी माँ के मस्त मस्त ३६ साइज़ के दूध पीने की जरूरत क्यूँ पड़ी. जीतेन्द्र अंकल का लौड़ा तो किसी मशीन की माँ को को बड़ी जल्दी जल्दी चोद रहा था.लग रहा था जैसे कोई साइकिल चल रही हो. XXX Hindi उनका पूरा बदन सौम्या पर आ गया था.सौम्या उनके लौड़े की एक एक हरकत पर नाच रही थी. मैं अच्छी तरह जानता हूँ की तेरी बुर में खाज है. धीरे धीरे मेरी बहन सौम्या भी गर्म हो गयी. उसकी कमर बड़े नशीले तरह से गोल गोल नाच रही थी. मेरे अंकल जोर जोर से माँ मेरी माँ के बड़े मुलायम मुलायम दूध को बेदर्दी से हाथ से मसल रहा था जैसे लोग अपनी बीबी के दूध बेदर्दी से मसलते है.वो पूरा मजा मारते हुए मेरी माँ को पौन घंटे तक ठोकते रहे. मेरे जीतेन्द्र अंकल अपने लौड़े में तेल लगाकर धार दे रहे थे. वो सौम्या को अपने साथ ले गयी.मैं फिर से जाग गया और अपनी बहन सौम्या को चुदते देखने के लिए फिर से जीतेन्द्र अंकल के कमरे में चला गया. वो नही नही कहने लगी. मैं उस समय सिर्फ १० साल का था पर फिर भी
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भारतीय यौन संबंध
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