इतना लंबा सफर है मेरी सेवा करो।चारो ने एक साथ बोला – कैसी सेवा मेम?में – मेरे शरीर में दर्द है उसकी मालिश कर दो।रमेश – ठीक है मेम कर देंगे। (हवस भारी मुस्कान के साथ)में – ठीक अभी बाहर जाओ मुझे चेंज करना है।चारो उठ कर बाहर आ गये। मैंने अपने सारे कपड़े उतार कर एक नाइटी काले रंग पहन ली। फिर मैंने उनको अपने केबिन के अंदर बुला लिया। अब वो चारो मुझे ध्यान से देख रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.में – तुम लोगो ने खाना खा लिया?राजेश – हां मेम हम लोग खाना खा कर ही चढ़े थे।में – तो अब क क्या इरादा है।सूरज – बस मेम आपके पैर की मालिश करना है फिर हम लोग सोयेंगे।में – ठीक है चलो दबाओ कोई एक मेरा पैर।मैं लेट गयी, सूरज ने मेरे पैर की उंगलियों को दबाना शुरू किया जिस वजह से मेरी आँख लग गयी मुझे पता ही नही चला। जब आंख खुली तो सूरज को छोड़कर बाकी उसके दोस्त सो चुके थे लेकिन सूरज अब मेरी पैर की उंगली को अपनी जीभ से चूम रहा था।मेरी आंख खुलते ही सूरज ने इशारो से आगे बढ़ने की अनुमति मांगी। में तो कब से तैयार थी, मैने तुरंत हां में अपने सर को हिलाया। सुरज को जैसे इशारा मिला उसने केबिन
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