भगवान बाजी के होंठ बहुत ही रसीले और गर्म थे।जैसे ही मैंने अपना होंठ बाजी के होंठ पर रखे। बाजी की गले से एक घुटी-सी आवाज़ निकल गई। मैं बाजी को कुछ देर तक चूमता रहा। चूमने से मैं तो गर्म हो ही गया और मुझे लगा कि बाजी भी गर्मा गई है। बाजी मेरे दाहिने तरफ़ बैठी थी। अब मैं अपने हाथ से बाजी की एक चूची पकड़ कर दबाने लगा। मैं इत्मीनान से बाजी की चूची से खेल रहा था क्योंकि यहाँ अम्मी के आने का डर नहीं था।मैं थोड़ी देर तक बाजी की एक चूची कपड़ों के ऊपर से दबाने के बाद मैंने अपना दूसरा हाथ बाजी की टॉप के अंदर घुसा दिया और उनकी ब्रा के ऊपर से उनकी चूची मींज़ने लगा। मुझे हाथ घुसा कर बाजी की चूची दबाने में थोड़ा अटपटा सा लग रहा था.और इसलिए मैंने अपने हाथों को बाजी के टॉप में से निकाल कर अपने दोनों हाथों को उनकी कमर के पास रखा और धीरे-धीरे बाजी के टॉप को उठाने लगा और फिर अपने दोनों हाथों से बाजी की दोनों चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा।बाजी मुझे रोक नहीं रही थी और मुझे कुछ भी करने का अच्छा मौक़ा था। मैं अपने दोनों हाथों से बाजी की दोनों चूचियों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से मसल रहा था। बाजी बस अपने गले















