मैंने पूछा।“ये भी कोई पूछने की बात है। आप हो ही अच्छे बाकी दीपक के पता नहीं कैसे कैसे दोस्त आते हैं”, वे बोलीं।“कैसे मतलब?”, मैंने पूछा।“अरे कोई कोई तो बिलकुल गंवार लगते हैं इसको डांटती भी हूँ पर इसको असर ही नहीं होता”, वे बोलीं।“ओह्ह”, मैं बोला।थोड़ी देर इधर उधर की बातों के बाद मैंने यकायक अपना हाथ बढाया और फुला को पास खींच लिया।“इतनी दूर बैठी हो की आवाज़ तक नहीं सुनाई दे रही। कल दीपक आयेगा तो दूर सोना ही है कम से कम आज की रात तो पास बैठ कर बातें करो”, मैंने बोला।“क्या सर”, फुला बोली। मगर मेरा प्रतिरोध नहीं किया। अब फुला मेरे बिलकुल पास थी..थोड़ी देर इधर उधर की बातों के बाद मैंने फुला से पूछा, “अच्छा मैं आपका दोस्त हूँ?”“हाँ ये बात भी पूछने की ज़रूरत है क्या?”, फुला बोली।“तो फिर एक वादा करो जो कुछ भी पूछूँगा उस का सही सही उत्तर दोगे कोई लाग लपेट बिना”, मैंने कहा।“हाँ बाबा हाँ”, फुला बोली।“तो फिर बताओ आपकी रजोनिवृत्ती हो गयी?”“कैसे कैसे सवाल पूछते हो आप भी “, वो बोली।“अब इसमें क्या है बताओ न। मैंने सुना है उसके बाद औरतों की पुरुष में रूचि ख़त्म हो जाती है”“नहीं ऐसा तो नहीं, पर हाँ मेरी रजोनिवृत्ती दो साल पहले आ गयी”, फुला बोली।“तो फिर सच बताओ प्रेम में रूचि ख़त्म हो गयी क्या दो साल















